Thursday, 30 August 2012

itihssas part 9 last

पेज  
 
हमें स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद के इतिहास का भी पुनरावलोकन करना होगा|वियर सावरकर ने अंडमान में घोर यातना सही, बैल की तरह कोलूह में जुत कर तेल पेला|जाई प्रकाश नारायण को बर्फ की सिल्लियों पर लिटाया गया,क्रांतिकारियों के परिवारों को अनेक यातनाएँ दी गयीं,उनकीसंपत्ति ज़प्त कर ली गयी,यह सब इतिहास में मोटे अक्षरों लाल सियाही से लिखना होगा|क्यों हर खेल के मैदान,हर हवाई अड्डे ,विश्वविद्यालय का नाम एक ही प्रिवार के सदस्यों के नाम पर रखा जाता है|नेहरू स्टेडियम,नेहरू विश्वविद्यालय,नेहरू तारा मंडल,इंदिरा गाँधी स्टेडियम,इंदिरा गाँधी हवाई अड्डा|क्यों कीलर ब्रदर्स के नाम पर कोई हवाई अड्डे का नाम नहीं रखा गया(सन ६५ की लड़ाई के वीर पाएेलट थे कीलर ब्रदर्स जिन्हों ने अपने छोटे से नेट एअर क्राफ्ट से अमरीका के सेबर जेट हवाई जहाज़ों को गिरा दिया था)|वीर सावरकर को जब बंदी बना कर पानी के जहाज़ से इंग्लेंड से भारत लाया जा रहा था,वो जहाज़ के शौचालय से नीचे समुद्र में निकल गये थे और तैरते हुए फ्रांस के तट पर जा पहुँचे थे,परंतु अँग्रेज़ी ना समझने के कारण फ्रांसीसी पुलिस ने उन्हें बंदी बना लिया और पीछा करते अँग्रेज़ों को सौंप दिया|यह एक रोमांचकारी एटिहासिक घटना थी,क्या इस घटना की स्मृति में नौ सेना किसी जहाज़ का नाम आई.एन एस. सावरकर रखने की सुध किसी को आई| 
में अपने लेख को राजनीतिक रंग देना नहीं चाहता|परंतु इतिहास के कलंक को तो धोना ही होगा|गाँधी के साथ साथ नेहरू जी का स्वतंत्रता संग्राम में और भारत के प्रधान मंत्री के रूप में निश्चित ही समुचित योगदान था,उन्होने जो राष्ट्र के लिए किया उसका अपनी जगह महेत्व है परंतु राष्ट्र ने जो नेहरू परिवार के लिए किया उस पर तुलनात्मिक दृष्टि डालना अप्रासंगिक ना होगा|मैं जानना चाहूँगा नेहरू जी ने अपने जेल प्रवास में कौन सी यातनाएँ झेलीं,कौन से कॉहलू से तेल पेल|जैल कक्ष तो मानों एक अध्यन कक्ष था,जैल में लिखी गयी पुस्तक डिस्कवरी ओफ इंडिया की रॉयल्टी आज तक उन पीढ़ियाँ खा रही हैं|यदि नेहरू परिवार ने अपना अल्लहाबाद का भवन राष्ट्र को समर्पित किया तो राष्ट्र ने टीन मूर्ति भवन सदा के लिए नेहरू जी और औरंगज़े रोड सदा के लिए इंदिरा जी को समर्पित कर दिए|यदि नेहरू जी गाँधी जी के साथ ना होते तो क्या होते,ज़्यादा से ज़्यादा राम जेठमलानी या नानी पालकीवाला होते| 
मैं इस अप्रिय प्रसंग को आगे बढ़ाना नहीं चाहूँगा,केवल इतना कहना चाहूँगा की देश के विभाजन से लेकर प्रथम प्रधान मंत्री के रूप में जो भूलें नेहरू जी ने की देश आज भी उसकी मार से उभरा नहीं है|इन भूलों को इतिहास में विशेष रूप से उल्लखित करना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियाँ उस से सबक़ ले सकें|कश्मीर समस्या नेहरू जी की भूल का परिणाम है|शेख अब्दुल्ला को शेरे कश्मीर बनाना उसका राज्याभिषेक करना,फिर गीदड़ बना कर जैल में डाल देना और फिर उनकी पुत्री द्वारा फिर शेर की खाल पहना कर बाहर निकाल देना,भिंद्रा वाले को संत की पदवी देना,उसे काग़ज़ का शेर बना कर अकाली दल को डराणवर जब काग़ज़ के शेर में जान पड़ गयी तो दरबार साहिब में सेना भेज कर एक महत्वहीन व्यक्ति को शहीद बना देना,क्या इन राजनीतिक भूलों और पापों को इतिहास का अंग बनाया गया है| 
भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की जल्दबाज़ी आज बहुराष्ट्र के स्थान को बढ़ावा दे रही है|संपूर्ण भारत एक अखण्ड राज्य है,राज्यों का संघ नहीं|नेहरू जी ईमानदार व्यक्ति थे उन्होने अपने लिए कोई धन अर्जित नहीं किया पंटु वो भ्रष्ट लोगों को आश्रय देते थे|भारत के प्रथम स्केंडल,जीप स्केंडल में कृष्णा मैनन को संरक्षण दिया|चीन से युद्ध में हार जाने के पश्चात नेहरू जी ने संसद में कहा"यह ठीक है की हमारा १६ हज़ार वर्ग मील क्षेत्र चीन के अधिकार में चला गया है परंतु यह एसा क्षेत्र है जहाँ घास का एक तिनका भी नहीं उगा",इस पर उन्हीं के मंत्री मंडल के एक सहयोगी श्री महावीर त्यागी ने पूछा,माननीय प्रधान मंत्री जी,मेरे सर पर आज तक एक बॉल भी नहीं उगा तो क्या मेरे शरीर को मेरे सर का कोई महत्व नहीं है|इसी संबंध में डाक्टर लोहिया ने पूछा,क्या नेहरू बताएँगे की चीन भारत पर आक्रमण करेगा,उन्हें आभास था या नहीं,यदि हा तो उन्होने संसद को विश्वास में क्यों नहीं लिया और सैनिक तय्यरी क्यों नहीं की,यदि नहीं तो उनकी गुप्तचर सेवा क्या कर रही थी| 
अभेद्य हिमालय पर चीन ने सड़क बना ली,बोंदिला तक चीन के टैंक भारत में घुस आए और हम हिन्दी चीनी भाई के नारे लगते रहे,पीकिंग में चाओ-एन -लाई के साथ जाम टकराते रहे|में स्पष्ट शब्दों में उन हिंदू राजनीतीबाज़ों को सावधान कर देना चाहता हूँ की उनकी यह सोच की हिंदू वोट तो जो उनके हैं उन्हें मिल ही जाएँगे और जीतने अधिक से अधिक वोट अल्पसंखाकों की तुष्टिकरण की नीति से प्राप्त कर लेंगे तो सत्ता सदा बनी रहेगी,परंतु अब हिंदू जाग उठा है|मुस्लिम राजनीतीबाज़ों को भी में विनम्रता से परंतु द्रढ शब्दों में यह कहना चाहूँगा की "भेड़िया आया,भेड़िया आया"कहकर वो बहुत बार सहानुभूति प्राप्त कर चुके हैं भविष्य में उनका यह मज़ाक़ कहीं उस कहानी को चरितार्थ ही ना कर दे| 
सिकंदर और अकबर महानों की तारह हमें कुछऔर महानों की भूमिका पर भी पैनी दृष्टि डालनी होगी,इतिहास की संरचना तथ्यों के आधार पर करनी होगी|दल,जाती धर्म सब से उपर उठ कर इतिहास के गौरव को उचित स्थान देना होगा,इतिहास की भ्रांतियों को मिटा कर,भूलों को उजागर करना होगा और इतिहास के कलंक को मिटाना होगा|इतिहास का पुनरावलोकन,पुनर्लेखन करना होगा,तभी हम सही अर्थों में एक धर्मनिरपेक्ष भारत का निर्माण कर सकेंगे,तभी हिंदू मुसलमान सही अर्थों में अपनी अपनी आस्थाओं का निर्वाह करते हुए भारत के प्राचीन गौरव और संस्कृति को पुनर्स्थापित कर सकेंगे| 
परम वैभवम् नेतुमेटत स्वराष्ट्रम 
समर्थ भावत्वाशीशा ते भ्राशाम 
 
(अर्थात अपने इस राष्ट्र को परम वैभव की स्थिति पर ले जाने में समर्थ हों)| 
और अंत में बक़ौल शायर 
लम्हों ने खता की थी सदियों ने सज़ा पाई 
बस और नहीं अब और नहींअब और नहीं 
 
 
वर्ष १९९३ विनोद कुमार मित्तल 
जी-७६ प्रताप विहार सेक्टर ११ ग़ाज़ियाबाद 
 

2 comments:

  1. this is the last part of this article.every indian must read this

    ReplyDelete
  2. this article contain 9 parts every indian must read it,also musalmans.

    ReplyDelete