Saturday, 13 October 2012

aktoobar mahan

अक्टूबर महान.१९९२-----------अक्टूबर महीने का अपना ही महत्व है और इस वेर्ष तौ अक्टूबर महिना कुछ विशेष लेकर आ रहा है. --२ अक्टूबर महात्मा गाँधी का जनम दिन है,अर्थात भारत को स्वतंत्र करने वाले महा सेनानी को श्रधांजलि.---६ अक्टूबर दशेहरा,अर्थात पुन्य की पाप पर,सत्य की असत्य पर विजय.----११ अक्टूबर शरद पूर्णिमा,अर्थात स्वादिष्ट खीर के मज़े,तथा चाँद की इस्निग्ध चांदनी मैन्स्वप्निल दर्शन.-------२६ अक्टूबर
दीपावली,अर्थात खुशिओं की लहर.परन्तु इस महीने की १५ तारीख का अपना ही महत्व है.और इस महत्व को दर्शाने जा रही है हमारी"भारतीय इतिहास अनुसन्धान परिषद्".---२ अक्टूबर है भारत को स्वतंत्र कराने वाले सेनानी का जन्म दिन,और १५ अक्टूबर है भारत को GULAAM BANANE वाले सेनानी का ४५० वा जन्म दिन,अर्थात एक और महान अकबर महान कई ४+१/२=४१/२ वीं शताब्दी ,वैसे तौ काएदे से चौथी शताब्दी मनानी चाहिए थी परन्तु उस महान के दुर्भाग्य से भारत स्वतंत्र नहीं हुआ था और धर्मनिरपेक्ष ताकतों के पुर्जे पूरी तरह मज़बूत नहीं हुए थे जितने आज हैं .या काएदे से पांचवी शताब्दी मनानी चाहिए ,लेकिन दर है की महान पांचवीं शताब्दी आते आते कहीं धर्मनिरपेक्ष ताक़तों के पुर्जे कहीं ढीले न पद जाये अतः ४१/२ वीं शताब्दी मानना हर दृष्टि से औचित्यपूर्ण है. ---भारतए इतिहास अनुसन्धान परिषद् ने जो कार्यक्रम की रूप रेखा बनाई हैउसके अनतेरगत अकबर महान पर एक कार्यशाला(वर्क शॉप) संयोजित की जाएगी ,बड़े बड़े इतिहासकार माता का नहीं नहीं पिता का नहीं नहीं दादा का गुणगान करेंगे,बताया जायेगा अकबर कितना महान था हिन्दू मुस्लिम एकता का कितना पक्षधर था.हिन्दू बीवी से किस तरह मुस्लमान बेटा पैदा किया.हिन्दुओं की सटी प्रथा को रोकना चाहता था,बड़ा इन्साफ पसंद था,ज़बर्दास्र अर्चितेक्ट था,फतेहपुर सिकरी का निर्माता था,हरम की पञ्च हज़ार खातूनों(बेगमों) को अलग अलग कक्ष दिए हुए थे.गरज यह की अकबर महान था.------------हमें महाराणा प्रताप का जन्म दिन तौ याद है नहीं जो हम दो जन्म दिनों का मुकाबला करवा देते.हमें तौ अपने पिता जी का भी जन्म दिन भी याद नहीं और अपना जन्म दिन भी वोह याद है जो पिता जी ने हाई स्कूल का फॉर्म भरवाते समय कम करके लिखवाया था.हमें तौ यह भी याद नहीं की हमारे पर दादा का क्या नाम था लेकिन खुदा का लाख लाख शुक्र है की तेमूर बाबर से लेकर बह्दुर्शः का नाम उनके बच्चों तक और लियाक़त अली से लेकर मियन नवाज़ शरीफ तक हमें सब याद है. किसी के जन्म दिन पर उसकी बुराई करना कोई अच्छी बात तौ नहीं फिर हम तौ उस सभ्यता के पुजारी हैं जहाँ एक बदमाश के मरने पर भी कहते हैं ,उसका स्वर्गवास हो गया. इस लिए अकबर महान के जन्म दिन से पहले ही अथवा जन्म से ४९९ साल ११ माह और कुछ दिन पहले ही असलियत बयां कर देना हम अपनी शराफत का तकाज़ा समझते हैं. अभी तक हम ने अन्खिओं के झरोखों से बंद सिनेमा हॉल मैं"मुघ्ले आज़म" प्रथ्वी राज कपूर और अनारकली के जिल्ले सुभानी को ही देखा है,आइये जल्दी जल्दी खुद को आप को और भारतीय इतिहास अनुसन्धान परिषद् को खुली आँख और खुली खिड़की से अकबर की महानता के दर्शन करा डैन ताकि जब अकबर महान पर कर्येशाला.(वर्क शॉप)का आयोजन हो तौ पंचेर लगाने मैं आसानी हो.-----------अकबर संसार का महानतम अय्याश और क्रूर व्यक्ति.---------------जयपुर के राजा. भारमल के तीन पुत्रों का अपहरण करवा कर फिरौती रूप मैं उसकी पुत्री जोधा बाई को प्राप्त किया. तथाकथित विवाह सांभर मैं हुआ जो न मुग़ल सल्तनत की न ही जयपुर महाराज की राजधानी थी.क्या दो राजाओं के परिवार मैं विवाह इस तरह होते हैं,इस्पष्ठ है की राज कुमारों की अदला बदली संभार मैं हुई. ----२.गोंडवाना की राज कुमारी को प्राप्त कने के लिए अकबर ने स्वयं युध्ह किया परन्तु वोह युध्ह मैं शहीद हो गयी. -------------३.बैरम खान जो न अकबर का केवल सिपेह सलार था बल्कि सर्परास्त्भी था,हमों की मृत्यु के बाद जब अकबर १४ वेर्ष की आयु मैं गद्दी पर बैठा,बैरम खान ने न सिर्फ उसकी परवरिश की,हिफाज़त भी की ऐसे मोहसिन को अकबर ने षड्यंत्र करके मावा डाला और उसकी विधवा सलीमा सुल्तान बेगम,जो अकबर की सगी फुफेरी बहिन भी थी को अपने हरम मैं दाल लिया. ---------------४.वीर भद्र पन्ना का राज कुमार अपने पिता की मृत्यु का समाचार सुन अपने घर जा रहा था,रास्ते मैं पालकी से गिर कर मर गया.इस्पष्ट है उसकी हत्या की गयी.वीर भद्र की पत्नी सटी होना चाहती थी,परन्तु अकबर ने स्वयं जाकर उसे चिता से उठा लिया और अपने साथ ले आया.यह कहने की आवाश्यकता नहीं की उसे भी अपने हरम मैं दाल दिया.-----------------५ज्ञाई मॉल को बंगाल भेजा .रास्ते मैं मर गया(हत्या कवादी) उसकी पत्नी सटी होने लगी तौ उसके सारे परिवार को कारागार मैं दाल दिया और उसे हरम मैं दाल दिया.----------------------------६.शेइख अब्दुल्वासी को अपनी बीवी से तलाक़ लेने को मजबूर किया वोह भाग कर बीदर चला गया और मर गया. -----------------७.बीकानेर के शासक कल्याण मॉल के भाई काहन .--को उसके परिवार के समूल नाश की धमकी देकर उसकी पुत्री का हरण किया. ------------------८.रजा भगवन दास(अकबर का दरबारी,जोधा बाई का रिश्तेदार को सैनिक टुकड़ी के साथ भेज कर जैसलमेर के शासक हर राइ ककी पुत्री को ज़बरदस्ती बुलवाया,हरम मैं दाल दिया.---------9---बांसवाडा दुन्गेरपुर के शासक को अधीनता के लिए विवश किया फिर उसकी पुत्रिओं से विवाह किया.--------------१०.अकबर मीना बाज़ार लगवाता था जहाँ बब्दे बड़े ओहदे दारों राजपूतों की महिलाओं का आना अन्वारिये था.जानने वेश मैं जाकर अकबर वहाँ अपने शिकार की तलाश करता था.-----------------------इन्साफ पसंद अकबर----------------१.मुसलमानों को राजस्व मैं पैदावार का दसवां भाग देना होता था हिन्दुओं से छत्ता भाग लिया जाता था.२.हिन्दुओं से एक विशेष कर(टैक्स)जजिया लिया जाता था.--------------------------------------------------------------------------अकबर महान निर्माता. ------------------------कहा जता है अकबर ने फ़तेह पुर सिकरी का निर्माण ,इतना कहना ही काफी है की जिस की आधी zindagi अय्याशी मैं और आधी बगावत को दबाने मैं गुज़री हो वोह क्या बस्ती का निर्माण करवाएगा..कश्मीर से बंगाल तक हर रोज़ कहीं न कहीं के सूबेदारों की खबर आता थी और कभी खुद कभी फौजों को दौडाए रखता था..यहाँ तक की उसके बेटे सलीम तक ने उसके खिलाफ बगावत की..थी औ
र unki रखवाली हिजड़े किया करते theऔर अकबर खुद उसे दबाने गया था, -------------------------------अकबर महान का महान हरम ---------------------------अकबर के हरम मैं ५ हज़ार महिलाएं थी और उन की रखवाली हिजड़े किया करते थे taki उनका शारीरिक सम्बन्ध किसी पुरुष से न हो जाये.कितना अमंविये था यह sab कुछ..अकबर का इतिहासकार अबुल्फज़ल लिखता हैकि अकबर ने अपने हरम की ५ हज़ार बेगमों के लिए अलग अलग कक्ष बनवाये थे. कितना झूट है यह. ५ हज़ार बेगमों का महल कितना विशाल रहा होगा,कहाँ गए उसके अवशेष जबकि आज मुघलों के नहाने और मूतने के कक्ष भी आज राष्ट्र्ये स्मारक बने जगह ज्स्घ बिखरे पड़ा हैं. स्पष्ट है की ५ हज़ार औरतें भेद बकरी की तरह किसी बाड़े मैं ठूंस दी गयी होंगी. ----------अकबर की महान धर्मनिरपेक्षता ---------------------- पादरी मंसरेट जो अकबर के दरबार मैं दो वेर्ष रहा अपनी पुस्तक कमेन्ट्री के पेज २७ पर लिखता है मुसमानों के धार्मिक उत्साह के कारण अनेक देव मंदिर नष्ट हो गए.हिन्दू मंदिरों की जगह असंख्य निकम्मे मुसलमानों के मकबरे और दरगाहें बना दी गयीं.अंध विश्वास के कारण इन की पूजा होती है मानो यह लोग संत थे. -------------हालाँकि अकबर अंदरूनी तौर पर कट्टर मुसलमान था लेकिन उसके मामलात मैं इस्लामी मुल्ला शरीअत के नाम पर दखल अंदाजी न करें इस लिए उसने दिन-इलाही का शोशा छोड़ रखा था और इस्लामी धर्मधिकरिओन को यह ड्रर पैदाकिये रखता था की वोह हिन्दू बन सकता है.पादरी मंसरेट कमेन्ट्री के पेज ६४-६५ पर लिखता है की अकबर समय पर नमाज़ नहीं पढता था,रोजा नहीं रखता था,हज़रात मोम्मद का यह कहकर मजाक उड़ाया करता था की अधिक कामुक होने के कारर्ण,बिना जूता प्यजमा के उन्हें घर से नकाल दिया गया था.---ऐसे अकबर महान का इसी १५ अक्टूबर को महान जन्म दिन है.धर्मनिरपेक्षता का तकाजा है की हमारे राष्ट्रपति महोदय केक कातेनौर उचित समझें तौ भैसा काटें और प्रधान मंत्री महोदय अपने मंत्री मंडल के साथ दासों दिशाओं मैं लौद्स्पेअकेर लगवा कर,दूर दर्शन पर लाइव टेलेकास्ट करवा kar जोर जोर से ताली बजवा कर कहें,हैप्पी बिर्थ डे तो यू ,हैप्पी बीत डे तू अकबर महा---आ--आन.==============अक्टूबर १५,१९९२,==========विनोद कुमार मित्तल.

Thursday, 30 August 2012

itihaas pqrt 2


इतिहास काल भी दो भागों में बाँटा जा सकता है| 

-राजनीतिक इतिहास -धार्मिक इतिहास|यद्यपि धर्म राजनीति से कभी अलग नहीं रहा,फिर भी राजनीति को भी हम दो भागों में बाँट सकते हैं| 
-धर्मांध राजनीति-धर्मनिरपेक्ष राजनीति|परंतु धर्मनिरपेक्ष राजनीति का अर्थ धरमहीनता नहीं है,इसलिए धर्मनिपेक्ष राजनीति का अर्थ हमें बहुत ही सावधानी तथा विद्वता से करना होगा| 
आइए हम विभिन्न धर्मों के उदगम का वर्णन संक्षेप में करें|कोई विवाद नहीं है हज़रत ईसा के धर्म का आवीरभाव लगभग २००० वर्ष पूर्व और हज़रत मोहम्मद के इस्लाम धर्म का लगभग १५०० वर्ष पूर्व हुआ|तो क्या ईसा से पहले संसार धर्मविहीन था|निश्चय ही नहीं|अनेक तर्क विलुप्त हुई सभ्यताओं के अवशेष,भाषा की सामीयता,मिलतेउर जुलते रीति रिवाज और मान्यताएँ आज भी साक्षी हैं की एक समय था जब पूरे विश्व में आर्य जीवन पद्यति प्रचिलित|भारतीय नाविक इंग्लेंड और अमरीका तक पहुँचे थे|अंतर केवल इतना था की भारतीय जहाँ भी गये उन्होंने अपने संस्कार और सभ्यता दी और वहीं के जान जीवन में एक रस हो गये|मध्य पूर्व एशिया और योरोप तक में आज भी हिदू नाम,हिंदू सभ्यता,पौराणिक गाथाएँ जैसी की तैसी विद्यमान हैं|इंडोनेशिया,बाली इत्यादि देशों में तो आज भी राम लीला का मंचन यथावत होता है|बोध, सिख जैन,आरीय सामाजी,सनातनी,वैष्णव,शेविय और अनाकानेक मत हिंदू दर्शन की ही अभाव्यक्ति करते हैं|इटली के इतिहास को आप गौर से देखें तो हिंदू धर्म के दर्शन कर सकते हैं|यहाँ तक की पोप शब्द भी संस्कृत पाप-(पापों को हरने वाला)शब्द का अपभ्रंश है|जब ईसाई मत का उदय समस्त योरोप में विभिन्न कारणों से उसे अपनाया जाने लगा|जब यपरोप वासी अन्य भागों में अपना राज्य स्थापित करने लगे,उनके द्वारा ईसाई मत दुनिया के अन्य भागो में फैलने लगा,यद्यपि ईसाई धर्म का विस्तारकहीं लालच देकर(अँग्रेज़ों की भारतीय सेना के सिपाहियों को ईसाई धर्म स्वीकार करने पर एक रेंक की पदोन्नति दी जाती थी)कहीं कुटिलता से ,कहीं भेद भाव का लाभ उठा कर तथा कहीं अन्य तरीकों से किया गया,परंतु बलात धर्म परिवर्तन का कोई प्रमाण नहीं है| 
यहाँ यह कहना अप्रसांगिक ना होगा,जब सोलवी शताब्दी में ईसाई मिशनरी केरल पहुँचे,उन्हों ने वहाँ के भोले भाले निवासियों को एक चमत्कार डिक्चायायैया|तीन मूर्तियाँएक जैसे भार और एक जैसे आकर की लीं|बताया गया इन में एक ईसा एक मोहम्मद और एक राम की है,तीनों मूर्तियाँ पानी में डाल दी गयीं,मोहम्मद और राम तो डूब गये और ईसा तैरते रहे|इस प्रकार ईसा की महत्ता को दर्शाया गया|उस समय गोवा दामन और दीव में ईसाई धर्मावलंबियों का शासन था|परंतु इस्लाम धर्म का विस्तार तो मशाल और तलवार की धार से किया गया|जहाँ जहाँ मुस्लिम आक्रमणकारी जाते थे वहाँ ना केवल लूटमार करते थे बल्कि वहाँ की सभ्यता ,वहाँ के पूजा स्थलों को तोड़ कर या थोड़ी फेरबदल करके मस्जिदों में बदल दिया करते थे तथा अपने अत्याचारों से धर्मांतरण को विवश कर दिया करते थे|यहाँ तक की आज भी सऊदी अरब में और अब सत्ता परिवर्तन के बाद अफ़ग़ानिस्तान में भी हिंदुओं को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जेया रहा है|अन्यथा उन्हें देश छोड़ने पर विवश होना पद रहा है|भारत में जीतने भी मुस्लिम आक्रमण हुए और बाद में मुस्लिम साम्राज्य के प्रत्येक सुल्तान ने भी अपने अपने ढंग से हिंदू मंदिरों और हिंदू इमारतों में फेरबदल करके अपने महल और मक़बरे बनवाए|हिंदू मंदिरों को तोड़ कर उसी के मलबे से मस्जिदें बनवाईं|और मंदिरों को अपवित्र किया|मुगल बादशाहों का एक मत उद्देश् अपने साम्राज्य और हरमका विस्तार रहा|अकबर द्वारा हिंदू कन्न्याओं से किए गये विवाह सर्वधर्म संभव की भावना से नहीं,राजपूतों की परंपरागत शनोशौक़त को ठेस पहुँचानेके उद्देश्य से पूर्णतयाअपहरण कांड थे |अकबर ने जोधा बाई के टीन भाईयों,राजकुमार खांगर,राज सिंह और जगन्नाथ का अपहरण करके उसके पिता जयपुर के महाराज राजा भार्मल से जोधाबाई को फ़िरोती के रूप में प्राप्त किया था| 
राजपूत योद्धा थे,लदे भी बहुत वीरता से परंतु संकीर्ण विचारधारा और अपने अहम् के कारण,एक दूसरे से तालमेल ना रखने के कारण एक एक करके प्रास्त होते गये यहाँ तक की मुस्लिम शासक भी जो मुगल साम्राज्य से पहले गुजरात से दक्षिण और बंगाल तक छोटी बड़ी रिआस्तोन के मालिक बन बैठे थे एक एक करके मुगल साम्राज्य के आधीन होते गये|अकबर महा धूर्त महा व्यभचारी महा दुष्ट और महा आततायी था,ऐसे व्यक्ति को महान कहना क्या उन लाखों राजपूतानियों के प्रति अन्याय नहीं होगा जिन्हों ने अकबर और उसके दरिंदे सिपाहीओं से अपने सतीत्व की रक्षा हेतु जोहर किए|अकबर की धूर्त्ताओं और विलास्ताओन पर एक पूरी पुस्तक श्री पी एन ओक द्वारा लिखित सप्रमाण उपलब्ध है|दम घोटने वाले इतिहास के इस प्रदूषण को दूर कने के लिए गहन शोधकरना होगा और इतिहास का सच सामनेलाना होगा तथा स्वतंत्र लोक तांत्रिक भारत के प्रत्येक नागरिकको उसे स्वीकार करना होगा|