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हमारे नये राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने जिस तर्क के साथ अँग्रेज़ी बोलने का व्रत लिया है,क्या वो हमारे संविधान की भावना के अनुरूप है,क्या ऐसा कर राष्ट्रपति ने संविधान की अवहेलना नहीं की है|राष्ट्र भाषा हिन्दी क्षेत्रीय भाषाओं की "सौत" है क्या|"सौत तो अँग्रेज़ी है हमारी राष्ट्र भाषा और हमारी क्षेत्रीय भाषाओं की|जवाहर लाल से लेकर आज तक हट प्रधान मंत्री ने यही कहा है की हिन्दी किसी पर थोपी नहीं जाएगी,क्या राष्ट्र भाषा राष्ट्र पर थोपी जाती है|हमारे विदेशी मेहमान अपनी भाषा में बोलते हैं और हमारे राष्ट्रपति अँग्रेज़ी में जवाब देते है|
छोटे छोटे थाइलॅंड जैसे देशों भी अगर आप अँग्रेज़ी शब्द"पोस्ट ओफिस"का पता पूछेंगे तो कोई बता नहीं पाएगा योरोप के अधिकांश देशों में आपकी अँग्रेज़ी अनपढ़,गूगी बहरी है|इटली, जर्मनी,रूस,जापान इत्यादि अनेक देश पूरी तारह से पश्चिमी सभ्यता के होते हुए भी अँग्रेज़ी की दासता से मुक्त हैं परंतु हमारे स्वतंत्र भारत के प्रथम नागरिक अँग्रेज़ी के आज भी गुलाम हैं|राष्ट्रपति भारत मा का ज्येष्ठतम पुत्र है,परंतु यह राजस्वी शनो शौक़त कैसी|करोड़ों रुपया राष्ट्रपति भवन पर खर्च होता है|सैकड़ों अंग रक्षक राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए हैं,क्या राष्ट्रपति की जान को बहुत ख़तरा है|राष्ट्रपति भवन के बजट से और राष्ट्रपति एस्टैट में एक पूरा विश्वविद्यालय चलाया जा सकता है|निश्चय ही रष्पति देश के सम्मान के प्रतीक हैं,परंतु हमारे विदेशी मेहमान जो उन से राष्ट्रपति भवन में मिलने आते हैं,क्या उस भवन की सराहना करते हैं,सब जानते है यह अंरेज़ों की दी हुई सौगात है|जिस देश का अभी पैदा होने वाला बच्चा भी क़र्ज़ में डूबा हुआ है उस क़र्ज़ के पैसे की यह शानो-शौकत कोई माने नहीं रखती|
आवश्यकता अनुसार छोटा सुसज्जित ,सुंदर भवन तथा आवश्यकता अनुसार सुरक्षा कर्मी भी राष्ट्रपति पद की गरिमा और देश की मर्यादा को बनाए रख सकते हैं|हमें गुलामी के चिन्हों की पहचान करनी होगी और गुलाम मानसिकता से छुटकारा पाना होगा|
एक ज्वलंत प्रश्न|खुदा ना करे हमारा सऊदी अरब से
युद्ध छिड़ जाए,हमारी वायु सेना के बमवर्षक विमान का एक मुस्लिम पाएलट क्या मक्के,मडीने पर बम गिराएगा|यद्यपि यद्ध के भी कुछ नियम होते हैन.बम वर्षा में भी अस्पताल,धार्मिक स्थल को यथा संभव बचाया जाता है परंतु फिर भी कहीं गिर सकता है|खाना काबा भी इस की ज़द में आ सकता है|(याद रहे कश्मीर के युद्ध में पाकिस्तान ने हाजी पीर की मस्जिद ध्वस्त कर दी थी)
यही प्रश्न में वायु सेना के हिंदू पायलाट से करता हूँ|काठमांडू का पशुपति नाथ मंदिर हिंदुओं के लिए खाना काबा की ही अहमियत रखता है,भगवान ना करे हमारा युद्ध नेपाल से हो जाए तो क्या हिंदू पायलाट काठमांडू पर बम गिराएगा(पशुपति नाथ मंदिर भी इसकी ज़द में आ सकता है)
अब यही प्रश्न ईसाई पाएेलट से|भगवान ना करे हमारा युद्ध इसराईल से हो जाए,क्या ईसाई पाएेलट बेतलेहम पर हमला करेगा(बेतलेहम ईसू मसीह का जन्म स्थान है)|इस प्रश्न का उत्तर स्वयं को देकर अपनी राष्ट्र भक्ति की स्वयं ही परीक्षा लें|
हम संक्षेप में अपने स्वतंत्रता संग्राम का वर्णन करेंगे|सन १७५७ में उठी चिंगारी सन १८५७ में ज्वालामुखी बन गयी फिर भी स्वतंत्रता ९० वर्ष पश्चात प्राप्त हुई|हमारा अंतिम स्वतंत्रता संग्राम इस शताब्दी के तीसवें और चालीसवें दशक में दो मोर्चों पर लड़ा गया|१-गाँधी जी का अहिंसक असहयोगांदोलन|२-नेता जी सुभाष और अनेक क्रातिकारियों का सशस्त्र आंदोलन|९ अगस्त सन ४२ को गाँधी ने अंग्रेज़ो भारत छोड़ो का एलान किया और करो या मरो का मंत्र दिया तो१९४३ में ९ अगस्त को ही नेताजी सुभाष ने भारतीय राष्ट्रीय सेना (आई एन ए) की स्थापना की|जहा गाँधी जी ने भारत के जनमानस को एक ध्वज के नीचे लाकर खड़ा कर दिया,वहीं नेताजी सुभाष ने विदेश में सेना का गठन कर कोहिमा पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फेहरा दिया|
वीर सावरकर और उनके अंडमान कारावास (कला पानी) के असंख्य साथियों ने यह सिद्ध कर दिया की स्वतंत्रता के लिए यदि आवश्यक हुआ तो अनेक जन्मों तक कष्ट सहने को तय्यार हैं,वहीं हमारे शहीदों ने यह सिद्ध कर दिया की वो अगर मरने क तय्यार हैं तो ज़ालिम अँग्रेज़ों कोमारने मैं भी कोई परहेज़ नहीं है|शहीद उधम सिंह ने इंग्लेंड की धरती पर जाकर जर्नल
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