विश्व में भारत के अतिरिक्त ऐसा कोई देश नहीं हैजिसका अपना कोई राज्य धर्म नहीं है|कुछ गिनती के देशों को छोड़ कर सभी देशों में लोकतंत्र है|हर देश मे जो समुदाय बहुमत में है उसी का धर्म वहाँ का राज्य धर्म है|कुछ मुस्लिम देशों को छोड़ कर सभी देशों में दूसरे धर्मों का भी आदर किया जाता है|धर्म निरपेक्षता का अर्थ धर्म विहीनता नही है,लेकिन हमारे देश का दुर्भाग्य है की हमारा देश धर्म निरपेक्ष नहीं,धर्मविहीन है|धर्मनिरपेकता के नाम पर यहाँ सारी राजनीति धर्म के नाम पर की जाती है,इस कुरीति से पीछा छुड़ाने का एक ही मार्ग है की भारत का राज्य धर्म वेदिक घोषित कर दिया जाए|जो अल्प संख्यक विशेषाधिकार अथवा धर्म के आधार पर एक और विभाजन का स्वप्न देखते हैं वो जाग जाएँ,अन्यथा जो १९४७ में नहीं हुआ अब होगा
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