Sunday, 19 August 2012

after dharm sansad held at haridwar

आह्वन

आरंभ हो गया धर्म युद्ध रन भेरी गूँज उठी फिर से,उत्तिष्ठित जागृत हिंदू वीर हो रहा नीर उँचा सर से.

कर रहे संत फिर आह्वान अंतिम प्रस्ताव हुआ पारित,बज उठा घोष प्रस्थान करो टक्कर लेनी है विषधर से.

हो रहीं आसुरी शक्ति प्रबल हिंदुत्व लगा है दैवं पर,अब राम काज के हेतु पुनः नर नारी निकल पड़ो घर से.


हुई पंगु इधर सब न्याय-विधा बंदूकें उधर प्रतीक्षा-रत,फौलाद बना लो वक्षसतल,जये घोष क्रो पंचम स्वर से.

करनी है मुक्त जन्म भूमि प्राणों की आहूती देकर,रिपूड़ाल पर टूट पड़ो ऐसे ज्यों गाज गिरे है अंबर से.

रर्नभूमि बनी है जन्म-भूमि, हैं रामलला दर्शन दुर्लभ,अब नहीं रही है सहन-शक्ति दो ईंट का उत्तर पत्थर से.

हैं तार कंतीले लौह भित्त पग पग पर प्रहरी असूरों के,सब बेधाएँ हट जाती हैं जब ज्वार उठे जान सागर से.
हट
अयोध्या,काशी,मथुरा से अंतिम अवसर है हट जाओ,मत बैर बधाओ नाड़ानों दशरथ नंदन शिव गिरधर से.

-----------विनोद कुमार मित्तल---------

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